आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ लागू करने की पुरजोर वकालत की। शून्यकाल में उन्होंने गैरजिम्मेदार जनप्रतिनिधियों को बीच में हटाने का अधिकार मतदाताओं को देने पर जोर दिया।
देश में विधायकों व सांसदों के प्रदर्शन की कोई सख्त निगरानी नहीं। चुनाव जीतने के बाद वे जवाबदेह नहीं रहते। चड्ढा बोले, पांच साल का लंबा कार्यकाल आधुनिक युग में बोझ है। गलत नेता चुनने पर पूरा इलाका पिछड़ जाता है।
दुनिया के 24 लोकतांत्रिक देशों में यह सुविधा है, जिसमें कनाडा व स्विट्जरलैंड प्रमुख। कैलिफोर्निया के 2003 केस में ग्रे डेविस को ऊर्जा व वित्तीय कुप्रबंधन पर लाखों हस्ताक्षरों से विशेष चुनाव में हटाया गया।
संविधान में राष्ट्रपति, जजों व सरकार हटाने की प्रक्रियाएं हैं, सांसदों के लिए क्यों नहीं? कई राज्यों में ग्राम सभाएं पंच प्रतिनिधियों को हटा सकती हैं।
चड्ढा के सुझाव: न्यूनतम 18 माह सेवा, ठोस कारण व 50 फीसदी मत। इससे चुनावी गुणवत्ता बढ़ेगी, लोकतंत्र मजबूत होगा। यह कदम वोटरों को सच्ची ताकत देगा।