नई दिल्ली, 11 फरवरी। कांग्रेस के सांसद सुखदेव भगत ने चेतावनी दी है कि संसदीय सत्रों में विपक्ष की आवाज को ठेंगा दिखाना लोकतंत्र की जड़ों को खोखला कर रहा है। मंगलवार की कार्यवाही रात तक निर्बाध चली, जिसमें राष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर बहस हुई—यही संसद का असली स्वरूप होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सदन सभी का है, सत्ता पक्ष का नहीं। विपक्ष को अभिव्यक्ति का पूर्ण अधिकार देना संसदीय मर्यादा और लोकतांत्रिक मूल्यों की मांग है। सत्ता पक्ष को इस दिशा में सक्रिय कदम उठाने चाहिए।
आसन के निर्णय यदि सत्ताधारियों की सहूलियत पर आधारित हों, तो हंगामा लाजमी है। अविश्वास जैसे गंभीर प्रस्तावों पर स्पीकर को निष्पक्षता बरतनी चाहिए, जो संवैधानिक भावना का सम्मान करे। आसन लोकतंत्र की रक्षा का प्रहरी बने, न कि सत्ता का कवच।
दिल्ली की基础设施 की दुर्दशा पर भगत ने गहरी चिंता व्यक्त की। रोहिणी के सेक्टर-32 में नाले में डूबकर युवक की मौत जहांगीरपुरी हादसे के बाद हुई। राजधानी का यह हाल अन्यत्र की स्थिति की ओर इशारा करता है।
भगत ने मांग की कि लापरवाहों पर सख्ती हो, जिम्मेदारियां स्पष्ट हों। पूर्वानुमानित कदमों से ऐसी त्रासदियों को रोका जा सकता है, सरकार को सतर्कता बरतनी होगी।