राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को नई औपचारिकता प्रदान करते हुए केंद्र सरकार ने इसके लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल अधिसूचित किया है। गृह मंत्रालय के ये नए नियम सभी सरकारी आयोजनों में इसे अनिवार्य बनाते हैं, जिसमें प्रदर्शन का तरीका, समय और दर्शकों का व्यवहार शामिल है।
मुख्य राजकीय समारोहों जैसे ध्वजारोहण, राष्ट्रपति-राज्यपालों के स्वागत और भाषणों में छह श्लोकों का पूरा संस्करण बजाना या गाना होगा।
कार्यक्रम में राष्ट्रगान के साथ होने पर वंदे मातरम पहले प्रस्तुत होगा। सभी उपस्थितजन सम्मान में सावधान मुद्रा अपनाएं, यह अपेक्षा है।
स्कूलों और कॉलेजों को दैनिक सभाओं में इसे स्थान देने का आह्वान किया गया है, जिससे युवा पीढ़ी में देशभक्ति की भावना मजबूत हो।
बैंड द्वारा गायन से ठीक पहले ढोल की थाप या बिगुल फूंकना जरूरी। हालांकि, सिनेमा हॉल्स में फिल्म के हिस्से के रूप में बजने पर दर्शकों को खड़े न होने की छूट है, ताकि मनोरंजन बाधित न हो।
राष्ट्रगीत को राष्ट्रगान जैसी गरिमा देने की यह पहल स्वागतयोग्य है, जो राष्ट्रीय प्रतीकों के मानकीकरण की दिशा में बड़ा कदम है।