नई दिल्ली के राज्यसभा में बजट बहस गरमाई जब राजस्थान के कांग्रेस सांसद नीरज डांगी ने वित्त मंत्री के नवें बजट को नीरस ठहराया। आंकड़ों से सजा यह बजट जनजीवन को रोशन करने में असफल रहा।
11 बरसों के अधूरे वादों पर परदा डालते हुए नई घोषणाएं कर दी गईं। बाजार ने नकारा—सेंसेक्स 2300 अंक लुढ़का, निवेशकों को भारी नुकसान। निवेशक, बाजार और आम आदमी सब निराश।
सरकार आज की मुश्किलें 2047 पर टाल रही, पास्ट फेल्योर का कोई प्लान नहीं। बेरोजगारी, महंगाई, गैरबराबरी के दौर में स्टार्टअप-स्किल की बयानबाजी बेअसर। एमएसएमई-अन्य क्षेत्रों से जॉब्स का वादा पुराने 2 करोड़ सालाना लक्ष्य निभाने में नाकाम।
भर्तियां ठप, कॉन्ट्रैक्ट जॉब्स उफान पर, प्राइवेट में सुरक्षा नदारद। पब्लिक कैपेक्स जॉब क्रिएटर बताना जोखिमभरा क्योंकि रिजल्ट जीरो। 2.8 करोड़ पढ़े-लिखे बेरोजगार घूम रहे। मनरेगा सुधारों पर किसान-मजदूर सड़कों पर, बजट चुप। नाम परिवर्तन से गांधी हटे, राम न फिट हुए—सरकार मूल्यों से कटी हुई।