महाशिवरात्रि की तैयारियां जोरों पर हैं। देवरिया के रुद्रपुर में बाबा दुग्धेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर चमत्कारों से भरा पड़ा है। गाय के दूध से जन्मा यह शिवलिंग पाताल से जुड़ा है। भक्त विश्वास करते हैं कि दर्शन और स्पर्श से रोग-कष्ट दूर हो जाते हैं।
मंदिर 18 एकड़ में विस्तृत है, शिवलिंग भूमि से 15 फीट गहराई में है। सीढ़ियां उतरकर दर्शन होते हैं, जो पातालेश्वर की उपाधि देता है। चट्टान जैसा शिवलिंग चंडलिंग रूप में महाकालेश्वर से प्रेरित है। दूरस्थ भक्तों के लिए यह ज्योतिर्लिंग समकक्ष है।
कहानी लुभावनी है। गोपालक ने गाय के दूध स्रोत का पीछा किया तो दिव्य शिव प्रकट हुए। दूध चढ़ाने की रिवायत यहीं शुरू हुई। महाशिवरात्रि, शिवरात्रि व सावन में मेले सजते हैं, बाबा का अलंकृत स्वरूप देखने आते हैं लाखों श्रद्धालु। राजनीति से भी जुड़ा यह स्थल आस्था का प्रतीक है। पर्व पर अवश्य जाएं।