पाकिस्तान द्वारा टी20 विश्व कप में भारत मैच बहिष्कार के फैसले से पलटने पर भारतीय नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं। केंद्र से राज्य स्तर तक और सत्ताधारी से विपक्ष तक सभी ने अपनी राय रखी।
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने पाकिस्तान की स्थिति पर कटाक्ष किया। चाहे क्रिकेट पिच हो या रणांगन, हर जगह पराजय। वैश्विक पटल पर सहायता की गुहार लगा रहा है। उनकी यह टिप्पणी पाकिस्तान की लाचारी को रेखांकित करती है।
यूपी मंत्री संजय निषाद ने कहा कि जनता की भावनाओं का सम्मान जरूरी। खिलाड़ी विश्व मंच पर देश का मान बढ़ाते हैं। खेल भावना महत्वपूर्ण, लेकिन देशभक्ति पहले। सरकार इसी दिशा में कदम उठाएगी।
भाजपा के प्रतुल शाहदेव ने स्पष्ट किया कि भारत का रुख निर्धारित है। अतीत में पाकिस्तानी खिलाड़ियों से हाथ न मिलाने के उदाहरण हैं। आईसीसी नियमों के तहत बीसीसीआई का स्वायत्त फैसला होता है।
कांग्रेस के राकेश सिन्हा ने विवादास्पद समय पर सवाल उठाए। संघर्ष विराम के बाद एक टी20 पर बवाल क्यों? कारोबारी स्वार्थ नजर आते हैं, क्योंकि ऐसे मैचों का बाजार मूल्य करोड़ों में। ड्रामेबाजी के बाद पाकिस्तान सहमत हुआ, फिर भी रहस्य बरकरार।
सपा के राजीव कुमार राय ने आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। पराधीनता स्वतंत्रता नहीं। राजनीतिक बयानबाजी से साफ है कि भारत पाकिस्तान की चालों से सतर्क है।