बस्तर का चेहरा बदल चुका है। जहां कभी नक्सली हिंसा का साया मंडराता था, वहां आज जनजातीय संस्कृति और विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। ‘बस्तर पंडुम’ का भव्य आयोजन 7 से 9 फरवरी तक जगदलपुर में हुआ, जो इस क्रांति का प्रतीक बना।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर इसे सलाम किया। उन्होंने लिखा, “बस्तर पंडुम में जनजातीय विरासत का शानदार प्रदर्शन हुआ। सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।” ऐसे प्रयास हमारी धरोहर को बचाते हैं और स्थानीय लोगों को मजबूत बनाते हैं।
मोदी जी ने जोर देकर कहा कि अब बस्तर हिंसा नहीं बल्कि प्रगति और आत्मविश्वास से जुड़ा है। भविष्य में शांति और सांस्कृतिक उत्थान की इच्छा व्यक्त की।
गृह मंत्री अमित शाह ने भी उत्सव में शिरकत की। जनजातीय भाइयों-बहनों को सम्मानित करते हुए उन्होंने कहा, “नक्सल भय से आजाद बस्तर अपनी धरोहर को विश्व स्तर पर ले जा रहा है।” नक्सलियों के बमों के अंधकार से निकलकर मोदी जी के नेतृत्व में यह क्षेत्र चमक रहा है।
शाह ने कला-खान-पान प्रदर्शनियां देखीं और बताया कि मजबूत नीति से बस्तर ने विकास का मार्ग अपनाया है। यह महोत्सव साबित करता है कि सकारात्मक इरादे असंभव को भी हासिल कर सकते हैं। बस्तर की यह सफलता भारत के अन्य प्रभावित इलाकों के लिए मिसाल है।