तेलंगाना में नगर निकाय चुनावों का बिगुल बज चुका है और मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने सोमवार को हैदराबाद में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा की नफरत वाली राजनीति को बेनकाब किया। 11 फरवरी को वोटिंग से पहले उन्होंने मतदाताओं से सकारात्मक बदलाव के पक्ष में फैसला लेने को कहा।
भाजपा पर सांप्रदायिक आग भड़काने का इल्जाम लगाते हुए रेवंत रेड्डी ने असदुद्दीन ओवैसी को उनका पसंदीदा हौवा बताया। ‘राम भक्ति का दावा, लेकिन ओवैसी ही उनकी रोटी हैं,’ उन्होंने व्यंग्य किया। केंद्र की सत्ता में रहते ओवैसी को काबू न करने पर तंज कसे और इसे भाजपा की मजबूरी करार दिया।
एआईएमआईएम के अन्य राज्यों में चुनाव लड़ने को जायज ठहराया और भय दिखाने की पुरानी चाल को नकारा। महबूबनगर रैली में नितिन नबीन के मोदी नारों पर ब्रेक लगाई। मोदी के गुजरात सीएम काल के पलामुरु-रंगारेड्डी वादे को आज तक न निभाने का जिक्र किया। स्थानीय मुद्दों पर राष्ट्रीय चेहरों का सहारा लेने को अनुचित बताया।
केंद्र के रवैये पर बोलते हुए कहा कि 12 बरसों में तेलंगाना को कोई बड़ी योजना नहीं मिली। आईटीआईआर कैंसिल, सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट आंध्र स्थानांतरित। दक्षिण भारत के साथ भेदभाव के आंकड़े दिए—तेलंगाना को 1 रुपए पर 42 पैसे, कर्नाटक को 16, जबकि बिहार को 6.16। तेलंगाना के सांसदों की खामोशी पर चुटकी ली।
चुनाव को विकास बनाम नफरत के द्वंद्व के रूप में पेश कर रेवंत रेड्डी ने मतदाताओं को जागरूक किया। ये चुनाव न केवल शहरी निकाय तय करेंगे, बल्कि राज्य के भविष्य की नींव भी रखेंगे।