जगदलपुर के बस्तर पंडुम समापन समारोह में गृह मंत्री अमित शाह ने माओवादियों को हथियार त्यागकर मुख्यधारा में लौटने का आह्वान किया। आदिवासियों से कहा कि नक्सल के खिलाफ जंग गांवों की हिफाजत और कल के लिए है, न कि किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध।
राज्य पुनर्वास पैकेज के तहत 2500 से ज्यादा ने हिंसा छोड़ी है, शाह ने सरेंडर की अपील की। लेकिन विस्फोटक बिछाने, बस्तियां लूटने या स्कूल उजाड़ने वालों पर बेरहम कार्रवाई होगी। माओवाद का योगदान विनाश ही है, इसका कड़ा प्रतिकार होगा।
क्षेत्र के उत्थान पर प्रकाश डालते हुए शाह ने बताया कि बंद स्कूल जीवंत हो चुके। पांच साल में बस्तर राज्य का सबसे समृद्ध संभाग होगा। दिसंबर अंत तक सभी गांवों में विद्युत, संचार, चिकित्सा, शिक्षा सुविधाएं होंगी।
सरकार आदिवासी किसानों से धान खरीदेगी, निःशुल्क अनाज, रसोई गैस, पेयजल उपलब्ध कराएगी। नक्सलमुक्ति पर पर्यटन को बढ़ावा: साहसिक यात्राएं, ग्रामीण आवास, आकाश-पथ, कांच पुल।
घोषणाएं हुईं: 118 एकड़ उद्योग क्षेत्र, इंद्रावती सिंचाई-बिजली योजना (120 मेगा वाट), रावघाट रेल प्रोजेक्ट (3500 करोड़), नहर जोड़ना, 90 हजार नौजवानों का कौशल विकास।
आतंक के अंधेरे से उत्सवमय रंगों तक बस्तर बदला है। शाह ने दंडामी मारिया, हल्बा, भतरा आदि समुदायों की सांस्कृतिक धरोहर laud की—अपनी बोलियां, नृत्य शैलियां, परंपराएं।
उत्सव की भूरि-भूरि प्रशंसा, विजेता दलों को राष्ट्रपति के दरबार में कला प्रदर्शन व आहार का सत्कार। नक्सल संघर्ष में शहीद सुरक्षा कर्मियों को नमन।