लोकसभा की गरिमा दांव पर लगी नजर आ रही है, जहां कांग्रेस की महिला सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र भेजकर संसदीय अधिकारों के हनन पर कड़ा ऐतराज जताया। एस जोतिमणि द्वारा शुरू यह पत्र प्रियंका गांधी वाड्रा सहित अन्य ने हस्ताक्षरित किया।
राष्ट्रपति के संबोधन पर बहस में स्थापित परंपरा तोड़ी गई। विपक्षी नेता राहुल गांधी को लगातार चार दिन बोलने न दिया जाना अघटित है। सत्ताधारी पक्ष के इशारे पर आठ विपक्षी सांसदों का निष्कासन, वहीं भाजपा सांसद की अशोभनीय टिप्पणियों को अनदेखा।
स्पीकर से बातचीत में न्याय की मांग हुई। उन्होंने त्रुटि मानी, लेकिन सरकारी निर्देशों का इंतजार किया। इससे उनकी भूमिका संदिग्ध हो गई। पारंपरिक समय पर पीएम सदन से दूर रहे, विरोध के बीच।
बाद में स्पीकर का बयान विपक्षी महिलाओं को बदनाम करने वाला निकला। सांसदों ने पलटवार किया कि उनका संघर्ष लोकतांत्रिक था। वे पहली पीढ़ी की राजनेता हैं, संघर्ष से निकलीं। निशाना साधना उनकी हिम्मत को तोड़ने की कोशिश है।
सरकार की जनविरोधी नीतियों पर सवाल उठाने की सजा मिल रही है। पीएम का बहिष्कार भयजनित था। कांग्रेस अहिंसा और मानव गरिमा की मिसाल है। स्पीकर से अपील है कि सत्ताधारी दबाव न झेलें, संवैधानिक संरक्षक बनें। इतिहास निष्पक्षता का साक्षी बने।