छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट में फैसला टल गया। हाईकोर्ट के जमानत आदेश को राज्य ने चुनौती दी थी, जिसकी सोमवार को सुनवाई हुई लेकिन दो हफ्ते बाद निर्धारित कर दी गई।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि इस बीच कोई महत्वपूर्ण प्रगति होने पर सरकार उसे अदालत में पेश कर सकती है। यह कदम जांच एजेंसी ईडी की दलीलों को मजबूत कर सकता है।
घोटाला कांग्रेस सरकार के दौर में पनपा, जिसमें शराब नीतियों का दुरुपयोग कर 3,000 करोड़ का काला धन कमाया गया। सिंडिकेट में अफसर, राजनेता और व्यापारी शामिल थे। ईडी की शिकायत में अब 81 आरोपी हैं, जिसमें हाल ही में 59 नाम जोड़े गए।
चैतन्य ने गिरफ्तारी से बचाव के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां उन्हें जमानत मिली। लेकिन सुप्रीम कोर्ट अब इसकी समीक्षा करेगा।
चुनावी माहौल में यह केस राजनीतिक रंग ले चुका है। भाजपा भ्रष्टाचार उजागर करने पर जोर दे रही, वहीं कांग्रेस षड्यंत्र का आरोप लगा रही।
दो सप्ताह की मोहलत में नई जानकारियां सामने आ सकती हैं, जो जमानत रद्द करने का आधार बनें। छत्तीसगढ़ में शराब कारोबार की पारदर्शिता पर बहस छिड़ गई है। न्याय की प्रतीक्षा में सभी की नजरें शीर्ष अदालत पर टिकी हैं।