सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल सीएम ममता बनर्जी की महत्वपूर्ण याचिका पर आज सुनवाई होगी, जिसमें वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को अवैध ठहराने की मांग है। सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस जे बी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की बेंच मामले की गहराई से जांच करेगी।
याचिका में चुनाव आयोग पर वोटरों के नाम मनमाने ढंग से काटने का आरोप है, जो गरीब और वंचित वर्गों को नुकसान पहुंचाएगा। ममता का दावा है कि नामों में मामूली अंतराल को आधार बनाकर लाखों असली वोटरों को वंचित किया जा रहा है।
महिलाओं के विवाहोपरांत नाम परिवर्तन और पते बदलने वालों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। पूर्वोत्तर के असम जैसे राज्यों में ऐसी प्रक्रिया न चलाए जाने से पक्षपात की पोल खुल रही है।
कोर्ट ने पूर्व सुनवाई में आयोग को नोटिस देकर कहा कि भाषाई विविधता के कारण स्पेलिंग भिन्नताएं स्वाभाविक हैं, इन्हें हटाने का बहाना नहीं बनाया जा सकता। अंतरिम रोक की मांग पर विचार होगा।
टीएमसी सांसदों की याचिकाओं के साथ यह केस जुड़ गया है। ममता ने आयोग को दिए गए कई पत्रों का जवाब न मिलने का भी जिक्र किया।
न्यायालय ने वास्तविक मतदाता अधिकारों की रक्षा का वादा किया है। बंगाल चुनावों से पहले यह सुनवाई राजनीतिक समीकरण बदल सकती है।