तेलंगाना में सियासी भूचाल आ गया है जब बीआरएस नेता केटी रामाराव ने हैदराबाद फॉरेंसिक लैब में लगी आग को मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की चाल बताते हुए न्यायिक जांच का ऐलान किया। हनमकोंडा में चुनावी सभा के दौरान पत्रकारों से बात में केटीआर ने दावा किया कि लंबे समय से अटका ‘वोट-फॉर-नोट’ केस के साक्ष्य नष्ट करने के लिए यह षड्यंत्र रचा गया।
आग की परिस्थितियां शक पैदा करती हैं—सुरक्षित जगह पर सर्दी में आग, स्टाफ की कमी और नुकसान पर बदलते सरकारी दावे। एफआईआर ने पर्दा उठाया कि 10 साल के प्रमाण, खासकर 2015 के, पूरी तरह जल गए, जबकि पहले मामूली नुकसान कहा गया था।
पहली मंजिल तक आग होने पर भी तीन मंजिल भवन में बुझाने में 3.5 घंटे लगना हैरान करता है। 50 सिस्टम, सर्वर सब खत्म, जिसका असर हजारों गंभीर केसों पर पड़ेगा। केटीआर ने कहा कि इससे अपराधी बच जाएंगे और न्याय व्यवस्था कमजोर होगी।
दिल्ली के बड़े लोगों के समर्थन का हवाला देते हुए केंद्र से शीर्ष एजेंसियों से जांच की अपील की। रिटायर्ड जज की अगुवाई में स्वतंत्र प्रॉब की मांग की और डीजीपी को सभी फैक्ट्स खोलने को कहा। पुलिस को सीएम का निजी बल बताते हुए पारदर्शिता पर जोर दिया।
यह मामला केस के फैसले से ठीक पहले हुआ, जो संदेह को गहरा बनाता है। बीआरएस नेता ने जनसुरक्षा को खतरा बताते हुए कड़ा रुख अपनाया, और आने वाले दिनों में जांच की लड़ाई तेज होगी।