कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के भाजपा सांसद रवनीत सिंह बिट्टू पर ‘गद्दार दोस्त’ वाली टिप्पणी से बवाल मच गया। भाजपा नेताओं ने इसे सिख समुदाय के प्रति कांग्रेस की छिपी नफरत का आईना बताया। राज्यसभा सदस्य बाबूराम निषाद ने बयान को अशोभनीय करार देते हुए कहा कि कांग्रेस का यह रवैया बार-बार सामने आता रहा है।
ऐसी भाषा किसी भी लोकतांत्रिक देश में बर्दाश्त नहीं, निषाद ने जोर देकर कहा। उन्होंने समुदाय के सम्मान की रक्षा पर बल दिया और कांग्रेस की राजनीतिक चालबाजी को नकारा।
डॉ. के. लक्ष्मण ने बयान को 1984 के दंगों से जोड़ते हुए कांग्रेस की सिख-विरोधी इतिहास को याद दिलाया। उन्होंने कहा कि ये लोग वोट बैंक के लिए समुदायों का शोषण करते हैं, लेकिन अब समाज जाग चुका है।
बृजलाल ने संसद में हंगामे को कांग्रेस की चाल बताया। इंडिया गठबंधन द्वारा लोकसभा बाधित करने को उन्होंने जनहित मुद्दों से बचने की रणनीति कहा। महिला सांसदों के इस्तेमाल को अनुचित ठहराते हुए माफी मांगे जाने की बात कही। राज्यसभा की सकारात्मक चर्चा का जिक्र किया।
‘घूसखोर पंडत’ फिल्म के शीर्षक पर रोक की मांग करते हुए बृजलाल ने जातिगत वैमनस्य की आशंका जताई। मंत्री बीएल वर्मा ने इसे पूरे सिख समुदाय का अपमान बताया और राहुल की बयानबाजी की आलोचना की।
राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा ने कांग्रेस को कटघरे में खड़ा कर दिया, जबकि संसदीय कार्यवाही और सांस्कृतिक संवेदनशीलता के सवाल उठे हैं। यह घटना विपक्ष की रणनीति पर सवालिया निशान लगा रही है।