मनोज बाजपेयी अभिनीत ‘घूसखोर पंडत’ फिल्म का शीर्षक पूरे देश में विवाद का कारण बन गया है। भाजपा सांसद मनोज तिवारी, आचार्य प्रमोद कृष्णम और शिया मौलाना सैफ अब्बास जैसे प्रमुख लोगों ने इसे अपमानजनक बताते हुए निंदा की है। मुंबई से शुरू हुआ यह आक्रोश अब राष्ट्रीय स्तर पर फैल चुका है।
मनोज तिवारी बोले, ‘ब्राह्मण, ठाकुर या कोई भी हो, घूसखोर जैसे शब्दों का प्रयोग गलत है। संविधान इसे अनुमति नहीं देता। समुदाय की भावनाएं आहत हों तो निर्माताओं को सजा मिले।’
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने तीखा प्रहार किया। ‘ऐसा नाम रखना पाप है। जानबूझकर समुदायों को टारगेट कर समाज तोड़ने की कोशिश हो रही है। यह विभाजनकारी साजिश का हिस्सा लगता है।’
मौलाना सैफ अब्बास ने सरकार से अपील की, ‘ऐसी फिल्में जो एक धर्म को बदनाम करें, उन पर रोक लगे। प्रचार के नाम पर सौहार्द बिगाड़ना दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत सरकार तुरंत प्रतिबंध लगाए।’
उन्होंने जोड़ा कि सिनेमा पहले समाज सुधार का माध्यम था, अब केवल विवाद के लिए बनाया जा रहा है। यह हंगामा साबित करता है कि सांस्कृतिक संवेदनशीलता की अनदेखी महंगी पड़ सकती है। फिल्म निर्माताओं को नाम बदलने पर विचार करना चाहिए।