मुंबई से शुरू हुआ ‘घूसखोर पंडत’ फिल्म का विवाद अब पूरे देश में फैल चुका है। मनोज बाजपेयी अभिनीत इस फिल्म के नाम पर ब्राह्मण समाज और सनातनियों में रोष है। कांग्रेस नेताओं ने एक स्वर में इसे अपमान बताया और सेंसर बोर्ड से हस्तक्षेप की मांग की।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख अजय राय ने चेतावनी दी कि धार्मिक व सामाजिक प्रतीकों पर हमले बढ़ रहे हैं। यह फिल्म का नाम समाज को गलत दिशा दे रहा है। समुदाय-विशेष को निशाना बनाना असहनीय है।
राकेश सिन्हा ने कहा कि सिनेमा लोगों को जोड़े, तोड़े नहीं। नाम बदलकर तनाव रोका जाए। सुरेंद्र राजपूत ने अभिव्यक्ति की आजादी और जिम्मेदारी का संतुलन बताया। जांच जरूरी ताकि नफरत न फैले।
प्रमोद तिवारी ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार किसी जाति का गुण नहीं। इसे समुदाय से जोड़ना समाज-विरोधी है। सुखदेव भगत ने लोकप्रिय कहावतों के दुरुपयोग पर रोक लगाने की बात कही।
कांग्रेस की एकजुट आवाज इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस बना रही है, जहां कला और संवेदनशीलता के बीच संतुलन की चुनौती सामने है।