भाजपा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए पश्चिम बंगाल सरकार के बजट को तुष्टिकरण का प्रतीक करार दिया। ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि मदरसों व अल्पसंख्यकों को प्राथमिकता देकर उद्योग-विज्ञान की अनदेखी की गई।
मोदी जी के नेतृत्व में राष्ट्र प्रगति पथ पर है, केंद्रीय बजट इसका प्रमाण, लेकिन बंगाल तुष्टिकरण की भूलभुलैया में भटक रहा। 5,713 करोड़ मदरसा-अल्पसंख्यक को, जबकि उद्योग को 1,400, आईटी को 217 व विज्ञान को 82 करोड़—यह बंगाल के वैज्ञानिक गौरव का अपमान है।
क्षेत्रीय विकास के नाम पर उत्तर बंगाल को 920 व पश्चिम को 810 करोड़—बहुत कम। मौलवियों को भुगतान में पते की शर्त न होना संदिग्ध। बुद्धदेव के पुराने बयानों से जिक्र कर कहा—कई मदरसे राष्ट्रविरोधी केंद्र थे, आईएसआई से जुड़े।
78 मुस्लिम जातियों को ओबीसी का दर्जा देकर बजटीय लाभ—यह राजनीति है। ममता के बयानों से डर का माहौल झलकता है। ‘मां-माटी-मानुष’ सिर्फ नारा, एक वर्ग को फायदा पहुंचाकर बाकी को नुकसान।
ममता से सवाल—मदरसा पर 5,700 करोड़ का क्या तुक? राज्य के भविष्य को क्यों दांव पर? टीएमसी की यह गलती बंगाल को पीछे धकेल रही।