जम्मू में जम्मू-कश्मीर बजट को लेकर हलचल तेज है। राजनीतिक दलों के नेता इसे युवाओं, किसानों और विकास के नजरिए से परख रहे हैं। प्रतिक्रियाओं में सकारात्मकता के साथ चिंताएं भी झलक रही हैं।
पीडीपी के वहीद उर रहमान पारा आशावादी हैं। बजट को लोगों की पीड़ा कम करने वाला बताया और युवा अवसरों, बेरोजगारी मुद्दे व किसान मजदूरी के लंबित मामलों के निपटारे की अपेक्षा की। ये समस्या एक वर्ष से जस की तस है।
जेकेबल विधानसभा की भाजपा सदस्य विक्रम रंधावा ने सतर्क प्रतिक्रिया दी। डेढ़ वर्षो से जनमानस की चाहतें पूरी न होने पर टिप्पणी करते हुए विस्तृत प्रावधानों का इंतजार जताया। जम्मू के लिए बजटीय हिस्सेदारी पर विशेष ध्यान होगा।
नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 2,000 करोड़ के प्रावधान को उदार बताया, किंतु स्थानीय प्रशासन की आलोचना की। पिछली वर्ष उमर अब्दुल्ला की घोषणाएं लागू न होने से जमीनी प्रभाव पर अविश्वास व्यक्त किया।
कांग्रेस के निजाम-उद-दीन भट्ट ने उत्पादकता बढ़ाने, नौकरियों पर बल और पर्यटन को मजबूत बनाने वाले बजट की वकालत की।
कुल मिलाकर, यह बजट जेकेबल की प्रगति का पैमाना सिद्ध होगा, जहां वादों से आगे बढ़कर क्रियान्वयन जरूरी है।