राजनीतिक तापमान चढ़ा हुआ है, जहां केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के चीनी अतिक्रमण के दावों और जनरल नरवणे की पुस्तक विवाद पर पलटवार किया। रक्षा मामलों को राजनीतिक दांवपेंच का हिस्सा बनाने को वे पूरी तरह खारिज करते हैं।
एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया में रिजिजू ने मौजूदा नेतृत्व की परिपक्वता पर बल दिया। 1962 की गोपनीय रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि नेहरू युग की कमजोरियों से देश को भारी नुकसान हुआ, लेकिन हमारी सरकार ने इसे राजनीतिकरण से बचाए रखा। ‘रक्षा सर्वोपरि है, राजनीति नहीं,’ उनका संदेश साफ था।
उन्होंने सीमा पर दीवाली मनाते हुए चीनी अधिकारियों से वार्ता का वीडियो शेयर किया, जो उनकी सक्रिय भूमिका दर्शाता है। यह पोस्ट नवंबर 2024 की है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने जवाबी कार्रवाई में नेहरू-गांधी परिवार के भ्रष्टाचार और नुकसानों पर पुस्तकालय स्थापित करने का वादा किया। वीडियो में उन्होंने बंटवारा, गुप्त दस्तावेज और आर्थिक हानि से जुड़ी सामग्री को एक जगह लाने की बात कही। ‘मेरी संसदीय टिप्पणियों पर मिले समर्थन से प्रेरित होकर यह कदम उठा रहा हूं, आप सब सुझाव दें,’ उन्होंने अपील की।
यह घटनाक्रम सीमा सुरक्षा और राजनीतिक इतिहास की पड़ताल को नई दिशा दे रहा है, जिसमें सत्तारूढ़ पक्ष जिम्मेदारीपूर्ण रवैये पर अडिग है। आने वाले दिनों में बहस और तेज हो सकती है।