7 फरवरी को हिंदू कैलेंडर के फाल्गुन मास कृष्ण षष्ठी पर माता यशोदा का जन्मोत्सव धार्मिक उल्लास के साथ उत्सवित होगा। वृंदावन की गोपियों में प्रसिद्ध यशोदा माईया का यह पर्व संतान प्राप्ति व पारिवारिक कल्याण हेतु अत्यंत फलदायी माना जाता है।
मान्यता है कि यशोदा जयंती पर निर्जल व्रत व विशेष अनुष्ठान से इच्छित संतान की प्राप्ति होती है। कन्हैया की लालिमा से रंगे उनके चित्र मंदिरों में विराजमान होते हैं, प्रेमपूर्ण लीला कथाएं सुनाई जाती हैं।
आराधना में दुग्धजन्य पदार्थ, फलाहार चढ़ाए जाते हैं। संध्या समय भजन समारोह आयोजित होते हैं, जहां आरती से दिव्य ज्योति प्रज्ज्वलित होती है। प्रसाद वितरण से पर्व समापन होता है।
ज्योतिषीय विवरण: तिथि 2:54 तक, नक्षत्र चित्रा प्रात: 2:28 तक। कन्या चंद्र। उदय-अस्त क्रमश: 7:06-6:05। प्रभात सर्वार्थ सिद्धि रवि योग 2:28-7:05 श्रेष्ठ। संध्या अमृतकाल 7:31-9:15। अन्य मुहूर्त: अभिजित दोपहर संक्षिप्त, विजय मध्याह्न, गोधूलि संध्याकाल।
अशुभ: राहु पूर्वाह्न, यमगंड अपराह्न, गुलिक प्रात:। शुभकार्य स्थगित रखें।
आधुनिक संदर्भ में यह त्योहार आस्था का आधार प्रदान करता है। पंचांग अनुसरण कर पूर्ण लाभ उठाएं, जीवन सुखमय बने।