प्रवर्तन निदेशालय की सतर्कता से अल्केमिस्ट ग्रुप का मनी लॉन्ड्रिंग का खेल उजागर हुआ। एनसीएलटी ने 3 फरवरी के आदेश में अल्केमिस्ट लिमिटेड की सीआईआरपी को पूरी तरह खारिज कर दिया, इसे कपटपूर्ण करार देते हुए।
ग्रुप ने निवेशकों को भ्रमित कर 1840 करोड़ से ज्यादा की ठगी की। ऊंचे रिटर्न और आवासीय योजनाओं के नाम पर लिए पैसे ग्रुप कंपनियों के बीच घुमाए गए, खासकर आईसीडी के जरिए अल्केमिस्ट लिमिटेड में। न संपत्ति दी गई, न राशि लौटी। ईडी ने लंबी जांच में 492.72 करोड़ की संपत्ति सीज की।
सीआईआरपी साई टेक ने शुरू की, लेकिन कोसी में ग्रुप की कंपनियां राज कर रही थीं—97 फीसदी वोट टेक्नोलॉजी पार्क्स के पास। सभी ईडी के निशाने पर। मकसद था जब्ती से मुक्ति और अपराधी धन को वैध बनाना। ग्रुप के पुराने कर्मचारी को आरपी बनाकर ईडी को दरकिनार किया गया।
ट्रिब्यूनल ने ईडी को सही ठहराया। आईबीसी का दुरुपयोग अपराध को बढ़ावा नहीं दे सकता। धारा 65 लागू कर सीआईआरपी समाप्त, रोक हटाई, आरपी हटाया और साई टेक को 5 लाख का दंड दिया।
यह निर्णय कानूनी स्पष्टता लाता है—दोनों कानून साथ चलेंगे, एक दूसरे को कमजोर नहीं करेगा। निवेशक सुरक्षित, अपराधी सावधान।