लोकसभा में विपक्ष के सांसदों द्वारा सत्तापक्ष की बेल पर धावा बोलने की घटना ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी। समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने इसे अनुचित करार दिया। गुरुवार को उन्होंने कहा कि ऐसा होना गलत है।
सदन में विपक्षी हंगामा चरम पर पहुंचा, जिससे कार्यवाही बार-बार स्थगित हुई। सांसद सीटों से उठकर सत्ताधारी सदस्यों की ओर बढ़े। प्रधानमंत्री मोदी का भाषण इस कारण टल गया, जिससे सदन की कार्यक्षमता प्रभावित हुई।
यादव ने जोर देकर कहा, ‘संसद में सभी को बोलने का अधिकार है। पीएम को रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लंघन है। यहां बहस और जवाबदेही होनी चाहिए।’ उनकी प्रतिक्रिया सहयोगी दलों में समर्थन पा रही है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने इसे परंपरा का हिस्सा बताया। ‘पहले भी सांसद बेल तक जाते रहे हैं। लोकतंत्र में विरोध का यह स्वरूप सामान्य है,’ उन्होंने कहा। साथ ही पीएम पर आरोप लगाया कि वे महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने से बच रहे हैं।
राष्ट्रपति के अभिभाषण का अनादर कर लोकतंत्र की छवि धूमिल हुई, तिवारी बोले। यह वाकया संसदीय संघर्ष को दर्शाता है, जहां संतुलन बनाना आवश्यक है। भविष्य की बहसें निर्णायक साबित होंगी।