बिहार के दिग्गज नेता उपेंद्र कुशवाहा ने राज्यसभा में पटना को उसके मूल नाम पाटलिपुत्र से नवीनतम करने का आग्रह किया। बुधवार को राष्ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा में उन्होंने मौर्य साम्राज्य के वैभवपूर्ण इतिहास को उजागर किया, जहां पाटलिपुत्र राजधानी के रूप में देदीप्यमान था।
उन्होंने बताया कि उस दौर में साम्राज्य की सीमाएं भूटान, नेपाल, अफगानिस्तान तक विस्तृत थीं। पाटलिपुत्र का नाम हमें अतीत की शान पर गर्व करता है। राष्ट्रपति मुर्मू के संदेश का जिक्र करते हुए कहा कि इतिहास की स्मृतियां भारत को ‘स्वर्ण चिड़िया’ से विकसित राष्ट्र बनाने में सहायक हैं।
कुशवाहा ने नाम परिवर्तन के पूर्व उदाहरणों का उल्लेख किया—मुंबई, कोलकाता, ओडिशा। इनके बाद पटना का बदलाव क्यों न हो? बिहार के मौर्यकालीन गौरव के प्रतीक आज भी जीवंत हैं।
यह प्रस्ताव सांस्कृतिक पहचान मजबूत करने का संकेत है। राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह मांग साकार होगी, जो बिहार की ऐतिहासिक गरिमा को नई ऊंचाई देगी।