बुधवार को हैदराबाद में बीआरएस नेता केटी रामाराव ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को घेरा। उन्होंने केएलएसआर इंफ्रास्ट्रक्चर को बेनामी कंपनी बताते हुए केंद्रीय एजेंसियों से जांच की अपील की। प्रेस मीट में केटीआर ने कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने और उसके अनुबंध रद्द करने की बात कही।
केटीआर के अनुसार, केएलएसआर रेवंत रेड्डी की छिपी हुई संपत्ति है। दिवालिया प्रक्रिया के दौरान भी बड़े ट्रांजेक्शन हो रहे हैं, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। न्यायिक प्रक्रियाओं में हेरफेर के आरोप गंभीर हैं।
टेलीफोन टैपिंग के बहाने दावोस में उठाया गया मुद्दा और एसआईटी गठन मात्र धुंधलका था, केटीआर ने कहा। 2018 के ईडी छापों ने केएलएसआर-रेवंत कनेक्शन को मीडिया में उछाला था।
मुख्यमंत्री पद मिलने के बाद केएलएसआर को अमृत, जल जीवन, स्कूल, सिंचाई व सड़क प्रोजेक्ट्स से 6,000 करोड़ का फायदा पहुंचा। साई मौर्या एस्टेट्स, जो रेवंत के रिश्तेदारों से जुड़ी है, के साथ डील 2018 आयकर छापों में पकड़ी गई।
जुलाई 2023 के एनसीएलटी केस ने वित्तीय रोक लगाई, लेकिन जमीन डील्स के जरिए फंड ट्रांसफर जारी रहा। केटीआर ने रेवंत को पर्दे के पीछे का सूत्रधार बताया। पुरानी जांचों के नतीजों को दोहराते हुए उन्होंने साफ कहा- भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं।
तेलंगाना में बीआरएस और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। जनता अब फैसला देख रही है।