सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मतदाता पुनरीक्षण विवाद में हस्तक्षेप किया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की याचिका सुनते हुए बुधवार को चुनाव आयोग को नोटिस जारी हुआ। जस्टिस संजीव खन्ना, जॉयमाल्या बागची और वीएम पंचोली की बेंच ने मामले को गंभीरता से लिया।
ममता ने व्यक्तिगत रूप से बहस की, साधारण पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए सभी के हक की लड़ाई बताया। एसआईआर से भेदभाव, नाम कटौती, दस्तावेज खारिजगी, घंटों की लाइनें, BLO सुसाइड और सैकड़ों मौतें गिनाईं। विवाहित महिलाओं के नाम सरनेम बदलने पर हटाने का आरोप लगाया।
श्याम दीवान ने दलील दी कि स्पेलिंग त्रुटि पर 70 लाख नोटिस गलत। माइक्रो ऑब्जर्वर असंवैधानिक। स्वीकार्य प्रमाण-पत्र न लिए जा रहे। समय कम बचा है।
आयोग पक्ष से राकेश द्विवेदी ने राज्य की लापरवाही बताई, अपर्याप्त अधिकारी देकर समस्या बढ़ाई।
बेंच ने सावधानी का निर्देश दिया, मतदाता अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया। सोमवार को फैसला होगा। यह सुनवाई चुनाव प्रक्रिया में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।