राज्यसभा में शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी ने मणिपुर को प्रजातंत्र के दमन का प्रतीक बताया। नए मुख्यमंत्रि चयन पर उन्होंने केंद्र को आड़े हाथों लिया। बिना चुनाव के फैसला थोपना जनता, संविधान और लोकतंत्र पर करारा प्रहार है।
घटनाओं का क्रम चौंकाने वाला: सीएम बने रहे, अचानक राष्ट्रपति शासन, संसदीय अनुमति से हटाया और नया चेहरा बिना वोट के। प्रियंका ने सवाल उठाया कि हिंसा के बाद जनता को चुनाव का हक क्यों नहीं? यह खतरनाक मिसाल है।
संसद में विपक्ष को बोलने न देना शर्मनाक। राहुल गांधी की गलवान किताब को दबाया, मैगजीन अंशों पर रोक। विपक्ष की भूमिका सत्य उजागर करने की, जो गायब हो रही।
एसआईआर पर ममता की सुप्रीम कोर्ट अपील को सही ठहराया। चुनाव आयोग भाजपा का औजार बन रहा, वोटर अधिकार छीन रहा—बिहार पैटर्न बंगाल-तमिलनाडु में। कानूनी लड़ाई जरूरी।
अमेरिका डील को फरमान कहा। टैरिफ असमानता, तेल खरीद प्रतिबंध, रणनीतिक क्षेत्र खोलना, कृषि आयात से किसान संकट। ट्रंप पोस्ट से भनक, भारत हितों की बलि। ईयू डील से बेहतर नहीं।
चतुर्वेदी की टिप्पणी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का आह्वान है।