पश्चिम बंगाल का SIR विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां बुधवार को इसकी बड़ी सुनवाई होगी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा 28 जनवरी को दाखिल याचिका इसकी धुरी बनेगी, जिसमें चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
SIR के तहत पूरे राज्य में वोटर लिस्ट का पुनरीक्षण हो रहा है, लेकिन ममता इसे वोटरों के अधिकारों पर हमला बता रही हैं। याचिका में कहा गया कि दस्तावेज जमा न कर पाने पर वैध नाम हटाए जा रहे हैं, जो लोकतंत्र के लिए खतरा है। प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और जल्दबाजी आम जनता को भ्रमित कर रही है।
चुनाव आयोग पर तानाशाही और पक्षपात का इल्जाम लगाते हुए ममता ने कहा कि यह संस्था अब निष्पक्षता खो चुकी है। याचिका संघीय सिद्धांतों के उल्लंघन का हवाला देती है और कोर्ट से तत्काल रोक व सुधार की अपील करती है।
राज्य में दस करोड़ वोटरों के नाम पर सवाल उठे हैं। गरीबों के पास जरूरी कागजात नहीं होने से वे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। भाजपा इसे फर्जीवाड़ा रोकने का कदम मानती है, लेकिन टीएमसी साजिश का शिकार बता रही है।
बुधवार की सुनवाई चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय करेगी। सुप्रीम कोर्ट का फैसला निष्पक्षता बहाल करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है। बंगाल की राजनीति सांस थामे इस फैसले का इंतजार कर रही है।