पुणे पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मुंढवा के 40 एकड़ सरकारी भूखंड के घोटाले में 1886 पेज की चार्जशीट दायर की है, जो इस जटिल साजिश का पूरा खुलासा करती है। शीतल तेजवानी (44) पर आरोप है कि उन्होंने जानबूझकर सरकारी जमीन अमाडिया एंटरप्राइजेज को बेचने का दस्तावेज तैयार किया।
कंपनी पार्टनर पार्थ पवार का नाम एफआईआर में नहीं आया, क्योंकि प्रारंभिक जांच में उनकी प्रत्यक्ष संलिप्तता सिद्ध नहीं हुई। वहीं, दिग्विजय पाटिल और सूर्यकांत येवले जैसे नाम प्रमुखता से उभरे हैं, जिन्होंने कथित तौर पर सरकारी संपदा को निजी धन बनाया।
पुलिस जांच में दस्तावेजों की जालसाजी और अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है। मामला अभी अधूरा है, आगे के तथ्यों पर अतिरिक्त चार्जशीट संभव। ईओडब्ल्यू सभी पक्षों की गहराई से जांच कर रही।
राजनीतिक रूप से संवेदनशील यह केस विपक्ष के हथियार बन गया है। अजित पवार ने दूरी बनाई, जबकि फडणवीस ने शीर्ष जांच का निर्देश दिया। यह प्रकरण प्रशासनिक सुधारों की मांग को तेज करता है।