कभी बचपन का सुपरस्टार, कभी ट्रोल्स का शिकार—सिलंबरासन राजेंद्र की जिंदगी ने साबित किया कि हार मानना किसे कहते हैं। 101 किलो वजन पर सोशल मीडिया की चोट खाई, लेकिन लॉकडाउन में 29 किलो कम कर एटमैन बनकर तमिल सिनेमा पर छा गए।
1983 में मद्रास के होटल में जन्मे सिंबू पिता टी. राजेंद्र की परंपरा में पले। चार साल की उम्र में ‘संसर संगीतम्’ के ‘आई एम अ लिटिल स्टार’ से स्टारडम हासिल किया।
अपनी राह खुद बनाने वाले इस कलाकार ने 2002 की ‘काधल अझिवथिल्लई’ से लीड रोल पाया। ‘मनमधन’ (2004) उनकी लेखनी और निर्देशन की मिसाल बनी, जो ब्लॉकबस्टर रही।
शोहरत के साथ मुश्किलें आईं। ‘विन्नईथंडी वरुवाया’ (2010) ने रोमांस का जलवा दिखाया, मगर देरी, विवाद और बीप सॉन्ग ने बदनाम किया। 2017 की असफल ‘अंबनावन…’ ने 101 किलो वाले सिंबू को ‘खत्म’ ठहराया।
लॉकडाउन ने नई जिंदगी दी। सख्त अनुशासन से 72 किलो हो गए। ‘मानाडू’ (2021) ने धूम मचाई, ‘वेंदु थनिंधाथु काडू’ ने अभिनय की बारीकियां दिखाईं।
44 वर्षीय सिंबू अब ‘ठग लाइफ’ में कमल हासन के साथ और ‘एटमैन सिने आर्ट्स’ से प्रोड्यूसर बन तैयार। उनकी गाथा जोश भरती है—वापसी की मिसाल।