राज्य में लंबे समय से चले आ रहे संकट के बीच भाजपा ने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया सोमवार को शुरू कर दी। राष्ट्रपति शासन के लगभग एक वर्ष बाद यह कदम उठाया गया, जो एन. बीरेन सिंह के त्यागपत्र के बाद 13 फरवरी को जातीय संघर्षों के कारण लागू हुआ था।
पार्टी संसदीय बोर्ड की ओर से राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को विधायक दल नेता चुनाव के केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में तैनात किया गया। भाजपा मुख्यालय की विज्ञप्ति ने इसकी जानकारी दी।
हालांकि बैठक की समयसीमा स्पष्ट नहीं है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेता मणिपुर विधायकों से जल्द मुलाकात करेंगे। भाजपा व एनडीए के कई विधायक राजधानी में मौजूद हैं, जिनमें बीरेन सिंह व शारदा देवी प्रमुख हैं।
शारदा देवी ने इंफाल में पत्रकारों से कहा कि केंद्रीय नेतृत्व ने सभी एनडीए सदस्यों को बुलाया है ताकि राज्य मुद्दों पर विचार हो। सरकार बनाने की चर्चा संभव है। बीरेन सिंह ने भी सहमति जताई, कहा कि व्यापक आमंत्रण से अच्छे नतीजे आने की संभावना है। एजेंडा का जिक्र नहीं हुआ।
राष्ट्रपति शासन चार दिन बाद ही चालू हुआ था और 12 फरवरी को समाप्त होगा। विधानसभा सभा 60 सीटों वाली है, जिसका कार्यकाल 2027 तक।
यह प्रक्रिया मणिपुर को नई दिशा देगी। हिंसा प्रभावित क्षेत्र में स्थायी शासन की आवश्यकता बनी हुई है। भाजपा के फैसले से उम्मीदें बढ़ी हैं।