पारंपरिक रेशम उद्योग को आधुनिक बनाने की दिशा में उत्तर प्रदेश ने लखनऊ में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू किया है। शुद्ध रेशम की पहचान और उत्पादन प्रक्रिया को जन-जन तक पहुंचाने का यह प्रयास राज्य के ग्रामीण उद्योगों के लिए वरदान साबित होगा।
सोमवार को रेशम निदेशालय में आयोजित समारोह में मंत्री राकेश सचान ने इसका शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि यह केंद्र उत्पादन, प्रशिक्षण, मार्केटिंग और गुणवत्ता नियंत्रण का एकीकृत प्लेटफॉर्म होगा।
केंद्र में शहतूत नर्सरी, वृक्षारोपण, रेशमकीट पालन, कोया निर्माण, रीलिंग और वस्त्र निर्माण की पूरी प्रक्रिया का प्रदर्शन होगा। उपभोक्ताओं को असली और नकली रेशम में फर्क समझाने के साथ ही यहां ट्रेनिंग और बिक्री की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और किसानों को सीधा बाजार मिलेगा, जबकि पर्यटक एरी, टसर व शहतूती रेशम की पूरी तकनीक देख सकेंगे। विभाग के प्रयासों से जीर्ण-शीर्ण इमारत अब चमकदार केंद्र बन गई है।
सीएम योगी के निर्देश पर रेशम उत्पादन को बढ़ावा मिला है। अब 300-350 मीट्रिक टन का उत्पादन हो रहा है। योजनाओं के तहत अनुदान, तकनीक और विपणन सहायता से किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य है। यह केंद्र उत्तर प्रदेश के रेशम उद्योग को वैश्विक पटल पर स्थापित करेगा।