राज्यसभा के पटल पर सोमवार को एक मार्मिक घटना घटी जब सी. सदानंदन मास्टर ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद देते हुए 31 साल पहले हुए राजनीतिक हमले की पूरी कहानी बयान की। केरल से मनोनीत यह सांसद, जो शिक्षक से राजनेता बने, ने सीपीएम कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए उस बर्बर हमले का जिक्र किया जिसने उनके दोनों पैर छीन लिए।
घटना का वर्णन सुनकर सदन स्तब्ध रह गया। बहन की शादी को लेकर चाचा जी के घर से बस से उतरते ही बाजार में घात लगाए अपराधियों ने उन पर धावा बोल दिया। पीछे से पकड़कर जमीन पर गिराया और पैरों पर वार किए, साथ ही राजनीतिक नारे लगाए। इस हमले के बाद से वे कृत्रिम अंगों पर निर्भर हैं, जिन्हें उन्होंने सदन में प्रदर्शित किया।
वाम दलों के सांसदों ने विरोध किया, नियम बताकर पैर हटाने को कहा। मास्टर ने पलटकर सवाल दागा कि हिंसा का इतिहास वाले आज सहिष्णुता की बात कैसे करते हैं। उन्होंने कहा, लोकतंत्र मतभेदों को हिंसा से नहीं, बहस से सुलझाता है। राष्ट्रभक्ति की शपथ पर बोलते हुए उन्होंने चेताया कि राजनीतिक हिंसा समाज को तोड़ती है।
सभापति का आभार जताते हुए उन्होंने संसदीय परंपराओं का सम्मान किया। केरल की सियासत में यह घटना पुरानी कटुता को फिर उभार रही है। सदानंदन का साहसी बयान राजनीतिक दलों को आत्मचिंतन के लिए मजबूर करता है, ताकि हिंसा का दौर खत्म हो और लोकतंत्र मजबूत बने।