भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने धर्मांतरण विरोधी कानूनों को चुनौती देने वाली याचिका पर 12 राज्यों को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में उत्तर मांगा है। यह कदम इन विवादास्पद विधाओं की संवैधानिकता पर सवाल खड़े करता है।
एनसीसीआई द्वारा प्रस्तुत याचिका में राजस्थान, यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड, एमपी, गुजरात, हिमाचल, कर्नाटक, झारखंड, छत्तीसगढ़, अरुणाचल और ओडिशा के कानूनों को खारिज करने की मांग है। इनका आरोप है कि ये धारा 25 के तहत धार्मिक आजादी, समानता और निजी अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।
याचिकाकर्ता ने तत्काल रोक लगाने की गुहार लगाई है, क्योंकि इन कानूनों का दुरुपयोग अल्पसंख्यक समुदायों पर अत्याचार के लिए हो रहा। मनगढ़ंत आरोपों से गिरफ्तारियां और उत्पीड़न आम हो गए हैं।
कोर्ट ने इसे पुरानी मामलों से जोड़ा, जहां तीन जजों की पीठ सुनवाई संभालेगी। कानून धोखे, लोभ या विवाह आधारित परिवर्तनों पर अंकुश लगाते हैं, पूर्व सूचना जरूरी बनाते हैं।
ये प्रावधान अल्पसंख्यकों के खिलाफ पूर्वाग्रही बताए जा रहे। मामला धार्मिक स्वतंत्रता बनाम सरकारी नियंत्रण की जंग है। फैसला भारत की बहुलतावादी परंपरा को मजबूत कर सकता है, मौलिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करते हुए।