कर्नाटक में हेट स्पीच विधेयक को लेकर नया मोड़ आया है। गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने सोमवार को घोषणा की कि राज्यपाल द्वारा 28 धाराओं पर सवाल उठाने के बाद यह बिल राष्ट्रपति भवन पहुंच चुका है। लागू करने की प्रक्रिया स्थगित।
‘राष्ट्रपति की समीक्षा का इंतजार। आवश्यक बदलाव कर वापस भेजेंगे,’ उन्होंने संवाददाताओं से कहा। मंत्री ने बिल का पक्ष रखते हुए चेताया कि बोलने की आजादी से घृणा फैलाना जायज नहीं।
‘समुदाय-विशेष पर हमले या निजी टिप्पणियां अराजकता को जन्म देती हैं। भाषणों से उपजी हिंसा के उदाहरण सबके सामने हैं। यही रोकने को यह कानून जरूरी है।’
सीजे रॉय सुसाइड केस में एसआईटी का ऐलान करते हुए बोले, ‘अटकलें बंद। रिपोर्ट से सच्चाई खुलेगी।’
बजट-2026 पर हमला बोला—’सीतारमण जी का सबसे घटिया बजट। विकास की अपेक्षाएं चूर। मनमोहन सिंह के मनरेगा जैसे कदम भुला दिए।’
53.50 लाख करोड़ में 16 लाख का कर्ज—फिर भी राज्यों को लेक्चर। ‘कर्नाटक खाली हाथ। कोई नया प्रोजेक्ट नहीं, खेती-सिंचाई-अवसंरचना गायब। शिक्षा क्रांति की जरूरत, लेकिन प्लास्टिक-पटाखों की कीमतें घटाईं। आईआईटी-एम्स का वादा झूठा।’
राज्य नेतृत्व दिल्ली पर निगाहें गड़ाए हुए है, जबकि हेट स्पीच बहस तेज।