मध्य प्रदेश में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भ्रष्टाचार के काले कारनामों पर शिकंजा कसा। भोपाल जोनल ऑफिस ने डॉ. अमरनाथ मित्तल (पूर्व स्वास्थ्य निदेशक) व उनकी जीवनसंगिनी अलका की 9.79 करोड़ मूल्य की संपत्तियों को प्मला के दायरे में अस्थायी कुर्की की चपेट में ले लिया।
यह जांच लोकायुक्त की एफआईआर पर आधारित है, जो भ्रष्टाचार निरोधक कानून के उल्लंघन पर दर्ज हुई। आरोप है कि डॉ. मित्तल ने अपनी सीमित आय से कई गुना अधिक दौलत कमाई।
जांच रिपोर्ट्स में वैध कमाई 60 लाख बताई गई, जबकि संपत्ति व व्यय 2.98 करोड़ तक पहुंचे, यानी 2.38 करोड़ का काला धन।
चालाकी से संपत्तियां पत्नी व हिंदू अविभाजित परिवार के नाम कर दी गईं, ताकि असली मालिकाना छिप जाए।
ट्रांजेक्शन में नकद का अंधाधुंध इस्तेमाल, बैंक में अस्पष्ट एंट्री और लेयरिंग के तीर चले। निजी खर्चों का ब्योरा गायब, जो मनी लॉन्ड्रिंग की पोल खोलता है।
एफआईआर से पूर्व संपत्ति बिक्री के बाद नई जमीनें-घर हथियाए। ईडी इसे अपकृत्य की आय ही मानती है।
जब्ती में बॉन्ड्स के साथ भोपाल व रायसेन की जमीनें। आगे की तफ्तीश से और राज खुलने की उम्मीद, जो सरकारी नौकरशाही में सुधार की बयार ला सकती है।