अहमदाबाद की सीबीआई विशेष अदालत ने 17 साल पुराने एक बड़े एक्साइज ड्यूटी रिबेट घोटाले में तीन व्यक्तियों को तीन साल की जेल और जुर्माने की सजा दी है। इस फर्जीवाड़े से सरकारी खजाने को 1.18 करोड़ रुपये का गबन हुआ।
सजा पाने वालों में तेजस अरविंदभाई देसाई, अमित मुरारीलाल गुप्ता और फरार समीर फतेह मोहम्मद इमामुद्दीन शामिल हैं। प्रत्येक को 50 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया। सूरत स्थित एम/एस साईं इम्पेक्स के नाम पर नकली कागजात बनाकर 51 अवैध क्लेम दाखिल किए गए थे।
2009 में दर्ज एफआईआर के आधार पर सीबीआई ने चार के खिलाफ चार्जशीट दायर की। जांच से साफ हुआ कि निर्यात के नाम पर फर्जी दस्तावेज दिखाकर रिबेट हड़पी गई। एक आरोपी घनश्याम गोर्धनभाई रफलिया की मौत से उनका केस बंद हो गया।
अदालत ने साक्ष्यों के दम पर बाकी तीनों को राजस्व चोरी का दोषी ठहराया। यह फैसला लंबे इंतजार के बाद आया, जो भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायिक दृढ़ता का प्रतीक है।
वर्तमान में जीएसटी जैसी प्रणालियों ने ऐसी सेंधमारी रोकी है, फिर भी यह घटना सतर्कता की याद दिलाती है। फरार अपराधी को पकड़ने का अभियान तेज है।