हिंदी सिनेमा के ‘दादा’ जैकी श्रॉफ की जिंदगी संघर्षों से भरी रही, जो चॉल के दरिद्र जीवन से अभिनय के शिखर पर पहुंची। 1 फरवरी को 69 वर्ष के हो रहे अभिनेता के पिता काकूभाई ने ज्योतिष विद्या से उनके स्टार बनने की भविष्यवाणी की थी। व्यवसाय में नुकसान के बाद परिवार तंगहाली में डूबा था, ऐसे में ये बात सपने जैसी लगी।
स्कूल जैकी के लिए युद्ध था। पढ़ाई में रुचि न होने पर सात साल की उम्र में भेजे गए, लेकिन जल्द ही छोड़ने की ठानी। पिता ने हंसते हुए कहा, ‘ठीक है, एक्टिंग तुम्हारा भाग्य है।’ गुजारा करने को मूंगफली की दुकान, ताज इंटरकॉन्टिनेंटल में कुकिंग, एड एजेंसी के काम। किस्मत का धक्का बस स्टैंड पर मिला- एक अजनबी ने लुक की प्रशंसा कर मॉडलिंग का सुझाव दिया। पहले प्रोजेक्ट से 7500 रुपये, फिर कई ऑफर।
देव आनंद के बेटे के दोस्त बने तो ‘स्वामी दादा’ (1982) मिली। ‘हीरो’ ने स्थापित किया, मगर हादसे ने नाक-जबड़े चूर किए। सुभाष घई के सहयोग से फिल्म पूरी, सुपरहिट। ‘आज का दौर’, ‘कर्मा’, ‘लज्जा’ जैसी फिल्मों ने शोहरत बरसाई।
जैकी की उड़ान गरीबी से ऊंचाइयों तक का प्रमाण है कि सही सलाह और विश्वास चमत्कार कर सकते हैं। उनकी कहानी बॉलीवुड की मिसाल है।