नई दिल्ली के जेएनयू में सुप्रीम कोर्ट के यूजीसी नियमों पर स्टे के विरोध में बवाल मच गया। साबरमती ढाबे पर लेफ्ट छात्रों ने ब्राह्मणवाद का प्रतीक जलाया और जोरदार नारेबाजी की। करीब 50 प्रदर्शनकारियों के इस कदम पर एबीवीपी ने कड़ा ऐतराज जताया, इसे यूनिवर्सिटी की बर्बादी का कारखाना बताया।
एबीवीपी से जुड़े प्रियांशु ने उजागर किया कि नारों में भाजपा व संघ की बर्बादी की बात हुई, जातिवाद को हवा देने वाले शब्द इस्तेमाल हुए। टैक्सपेयर्स के पैसे से चलने वाली जेएनयू में ऐसी बेलगामि अनुचित है। लोकतंत्र की गरिमा को ठेस पहुंचाने का यह प्रयास अस्वीकार्य है।
पीएचडी छात्र कृष्णकांत द्विवेदी ने इसे देश-विरोधी हरकत करार दिया। स्टे से पूर्व समर्थन करने वाले लेफ्ट गुट अब आक्रोशित हैं। संघ-भाजपा विरोधी नारे स्वयंसेवकों का अपमान हैं और समाज को बांटने का षड्यंत्र हैं।
प्रदर्शनकारी लेफ्ट संगठनों का कहना है कि अदालती फैसला मनुवादी ताकतों का समर्थन करता है। जेएनयू की यह ताजा घटना छात्र राजनीति की कटुता को दर्शाती है। भविष्य में शांति बनाए रखना चुनौतीपूर्ण होगा।