दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में लिंग भेदभाव का काला अध्याय उजागर हुआ है। विधानसभा स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने गुरुवार को एलजी वीके सक्सेना को पत्र भेजकर इस मुद्दे को उठाया। शिक्षा निदेशालय द्वारा महिला और पुरुष शिक्षकों की अलग-अलग वरिष्ठता सूचियां बनाए जाने से महिलाओं को प्रमोशन में भारी नुकसान हो रहा है। पत्र में उदिता सोसायटी की अध्यक्ष नीति भरारा ओबेरॉय का 26 जनवरी 2025 का पत्र भी संलग्न है।
इस व्यवस्था के चलते पीजीटी, उप-प्रधानाचार्य व प्रधानाचार्य पदों पर महिलाओं को वर्षों इंतजार करना पड़ता है, वहीं पुरुष समकक्ष तेजी से आगे बढ़ जाते हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय में यह मामला विचाराधीन है, जहां 1 मई 2025 को विभाग ने सूचियों के विलय की बात कही थी। एलजी कार्यालय ने भी पुनः जांच और एकीकरण की सिफारिश की थी।
फिर भी विभाग पीजीटी को उप-प्रधानाचार्य पदोन्नति का प्रस्ताव अलग सूचियों पर चला रहा है, जो महिलाओं को उनके हक से महरूम कर रहा है। स्पीकर ने एलजी से मांग की है कि वे तुरंत हस्तक्षेप करें। निर्देश जारी हों कि लिंग भेदभाव समाप्त हो और प्रमोशन स्थगित रहें जब तक सूचियां एक न हों।
गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि महिला शिक्षिकाओं का न्याय सुनिश्चित हो, विभागीय सुस्ती से उनका हक न छिन जाए। एलजी से शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा है।
यह घटना दिल्ली सरकार की शिक्षा नीतियों पर सवाल खड़े करती है। समान अवसर सुनिश्चित करने से न केवल महिलाएं सशक्त होंगी, बल्कि पूरा शिक्षा तंत्र मजबूत बनेगा।