शेखपुरा के गगरी पंचायत के गुणहेसा गांव से तर्जुमान बनी कृष्णा देवी की सफलता ग्रामीण भारत की सच्ची मिसाल है। सामाजिक बाधाओं को पार कर जीविका के दम पर उन्होंने दक्षिण भारत की तंजौर पेंटिंग को बिहार की शान बना दिया।
चेन्नई प्रशिक्षण के बाद उनकी कला निखर गई। प्रक्रिया जटिल है—प्लाई बोर्ड पर चूना-मिट्टी से उभरे भगवान, चटख रंग और सोने का पर्क। एक पेंटिंग में 15 दिन से ज्यादा लगते हैं।
कई राज्यों के मेलों में प्रदर्शित होकर दिल्ली आदि में लाखों की बिक्री। बिहार में चार लाख का टर्नओवर। जीविका ने स्टॉल, लोन और मान्यता दी।
प्रवीण कुमार की जोड़ी ने 2020 में महामारी के बाद जीविका से बल पाया। नोएडा में सम्मान मिला, लोग कायल। कच्चे माल के लिए तमिलनाडु दौर जारी।
पटना गांधी मैदान से हरियाणा तक स्टॉल लगे, मांग बढ़ी। कृष्णा-लक्ष्मी चित्र लोकप्रिय। यह साबित करता है कि मेहनत और सहयोग से महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होकर संस्कृति को संजो सकती हैं।