पश्चिम बंगाल में सीमा सुरक्षा को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट के ममता सरकार को बीएसएफ को जमीन सौंपने के निर्देश ने सियासी बवाल मचा दिया। टीएमसी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष ने केंद्रीय एजेंसी का बचाव करते हुए कहा कि राज्य ने अपनी जिम्मेदारी निभा दी है।
प्रेस से बातचीत में घोष ने स्थिति स्पष्ट की, ‘हाईकोर्ट फैसले पर चुप रहूंगा। सच्चाई यह है कि जमीन पहले ही बीएसएफ को ट्रांसफर हो चुकी। बॉर्डर से 50 किमी अंदर तक उनका दबदबा है, कोई कमी की खबर नहीं।’
घुसपैठ के आरोपों पर उन्होंने कहा, ‘बीएसएफ के कंट्रोल में होते हुए अवैध पारगमन कैसे? राज्य पुलिस का मामला नहीं। बीएसएफ असमंजस में है। हमने जमीन दी, बाकी राजनीति है—राष्ट्र के हित में नहीं।’
अमित शाह के दौरे पर भाजपा को आड़े हाथों लिया। ‘चुनावी मौसम में मोदी-नड्डा बंगाल पहुंचते हैं, उसके बाद लापता। पीएम का टेलीप्रॉम्प्टर भाषण यहां बेअसर।’
संदेशखाली पर भ्रम फैलाने वालों को ललकारा, ‘जनता समझदार है। बंगाल की प्रगति का श्रेय सही जगह जाएगा, भाजपा को विश्वास नहीं।’
आरजी कर रेप-हत्या पीड़िता के माता-पिता के दावों को नकारा। ‘पार्टी ने बात नहीं की। बाहरी तत्व झूठे बयान करवा रहे।’
बंगाल की सियासत में यह टकराव भविष्य की जंग का संकेत दे रहा।