प्रदेश की योगी सरकार ने शिक्षा कर्मियों के हित में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। कैबिनेट बैठक में स्वीकृति मिली कि बेसिक व हाईस्कूल शिक्षा से जुड़े 15 लाख शिक्षक व सहयोगी स्टाफ सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में नकदरहित इलाज करा सकेंगे।
शिक्षक दिवस की घोषणा पर अमल करते हुए यह व्यवस्था लागू होगी, जिससे कुल 448 करोड़ रुपये का वार्षिक भार पड़ेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 30 प्रस्तावों की मंजूरी की जानकारी साझा की।
माध्यमिक शिक्षा विभाग में 2.97 लाख लाभार्थी होंगे, 89.25 करोड़ के व्यय से, जैसा कि मंत्री गुलाब देवी ने बताया। संस्कृत, व्यावसायिक व मानदेय शिक्षक शामिल। बेसिक शिक्षा में 11.95 लाख को 358.61 करोड़ में कवरेज, प्रति व्यक्ति 3,000 रुपये प्रीमियम पर।
पीएम पोषण रसोइये से लेकर केजीबीवी वार्डन तक सभी को लाभ। निजी अस्पताल सचीज से जुड़े होंगे, दरें पीएम-जेएवाई व एनएचए मानकों पर। जिला समितियां स्ववित्तपोषित मामलों का सत्यापन करेंगी।
पहले से अन्य योजनाओं में शामिल वर्ग बाहर। सरकार का यह प्रयास शिक्षकों को आर्थिक बोझ से मुक्त कर बेहतर शिक्षा सुनिश्चित करेगा, जो प्रदेश के भविष्य के लिए मील का पत्थर साबित होगा।