प्राकृतिक आपदाओं के दौरान गोल्डन ऑवर सबसे कीमती होता है। पश्चिमी कमान के आपदा प्रबंधन कॉन्क्लेव ने एआई और उपग्रह तकनीक से लैस सिस्टम पेश कर भारत की तैयारी को मजबूत किया।
एनडीएमए, सैन्य नेतृत्व और आईआईटी विशेषज्ञों ने चंडीमंदिर में एक मंच पर आकर रिएक्टिव से प्रोएक्टिव मॉडल पर जोर दिया। सब कुछ नष्ट होने पर भी काम करने वाले संचार तंत्र ने सबको प्रभावित किया।
लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (से.) ने राष्ट्रीय सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बातें साझा कीं। जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल अजय चांदपुरिया ने राहत कार्यों में सेना की भूमिका रेखांकित की।
प्रदर्शनी में ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए बचाव साजो-सामान, सीबीआरएन सुरक्षा और चिकित्सा किट दिखाए गए। एनडीआरएफ ने 2025 बाढ़ की समीक्षा की और भविष्य के समाधान बताए।
समुदाय को सशक्त बनाने वाली पहल और 2026 के प्रशिक्षण कैलेंडर पर सहमति बनी। यह तालमेल भारत के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को अभेद्य बनाएगा।
कॉन्क्लेव ने साबित किया कि एकजुट प्रयास से कोई आपदा असंभव नहीं। देश अब बेहतर तैयार है।