पूरे भारत में हंगामा मचा है यूजीसी के नवीन नियमोंを लेकर, जहां सामान्य श्रेणी के छात्र और सवर्ण बिरादरी ने तीव्र निंदा की है। हापुड़ पहुंचे आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इसे राष्ट्र-विरोधी फैसला बताते हुए चेतावनी दी है।
आईएएनएस को दिए बयान में उन्होंने कहा, ‘समाज को टुकड़ों में बांटने वाली कोई योजना देश के लिए शुभ नहीं। भारत तेजी से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है, जाति विभेद इसमें बाधक बनेगा।’ नियमों पर गहन पड़ताल के बाद ही पूर्ण मत प्रकट करने की बात कही।
जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने इन्हें अन्यायपूर्ण करार दिया। ‘समान शिक्षा नीति ही समानता लाएगी, जाति झगड़ों को बढ़ावा गलत। विशेष चिंता की बात है झूठी शिकायतों पर सजा न होना।’
उच्च शिक्षित युवाओं की बेरोजगारी पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘नीतियां रोजगार और स्वावलंबन सुनिश्चित करें। ये यूजीसी नियम मानवता के खिलाफ हैं, शीघ्र प्रतिबंध लगाएं।’
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद मामले में आचार्य प्रमोद ने संतुलन की अपील की। ‘पुलिस संयमित रहे, संत भी धैर्य रखें। सनातन शासन में संत सम्माननीय, पर संयम अपरिहार्य।’
प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ रही है। उच्च शिक्षा में जाति संतुलन बनाए रखते हुए राष्ट्रीय एकता को प्राथमिकता देना जरूरी। सरकार को तत्काल कदम उठाने होंगे।