संसद सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के संयुक्त सदनों को संबोधन के बीच विपक्ष की बेकाबू नारेबाजी ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इसे देशहित के खिलाफ बताते हुए विपक्ष की कड़ी निंदा की।
उन्होंने कहा कि अभिभाषण में ऐतिहासिक महत्व के विषय थे। वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने और ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के योगदान पर चर्चा हो रही थी। गुरु तेग बहादुर के 350वें बलिदान दिवस पर राष्ट्रपति ने त्याग की मिसाल पेश की, पर विपक्ष शांति भंग करता रहा।
रिजिजू ने तर्क दिया कि संसदीय बहस में असहमति स्वाभाविक है, लेकिन राष्ट्रपति के मंच पर अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं। यह सम्मान का प्रश्न है। उन्होंने विपक्ष से कहा कि संसद में गरिमा का पालन करें, क्योंकि यहां हर सांसद राष्ट्र का प्रतिनिधित्व करता है।
यह विवाद संसद की कार्यवाही को प्रभावित कर सकता है। रिजिजू की चेतावनी साफ है- जनता सब देख रही है। लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए सभी दलों को संयम बरतना होगा। भविष्य की बहसें इसी गरिमा पर निर्भर करेंगी।