नई दिल्ली के संसद भवनों में बुधवार को बजट सत्र की शुरुआत हंगामे के साथ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दोनों सदनों को संबोधित करते हुए ग्रामीण रोजगार की ‘जी राम जी’ योजना की तारीफ की, जिस पर विपक्ष ने तीव्र विरोध जताया और योजना रद्द करने की मांग उठाई।
विकसित भारत-ग्राम कानून के अंतर्गत 125 दिनों के रोजगार की गारंटी, भ्रष्टाचार पर अंकुश और ग्रामीण विकास पर राष्ट्रपति के बयान पर सत्ताधारी पक्ष ने वाहवाही लूटी। विपक्षी सदस्य खड़े होकर नारेबाजी करने लगे, जिससे अभिभाषण रुक गया।
पुनः शुरू करते हुए राष्ट्रपति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयासों का जिक्र किया। किसान, पशुचारक और मत्स्य पालकों के लिए नई सुविधाएं, सहकारिता को बढ़ावा देने वाले त्रिभुवन विश्वविद्यालय और 10 हजार एफपीओ कृषि को नई दिशा दे रहे हैं।
महिलाओं के उत्थान को प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि विशेष योजनाओं के साथ-साथ अन्य कार्यक्रमों में भी महिलाओं को केंद्र में रखा गया है। स्व सहायता समूहों से जुड़कर लाखों महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं। दो करोड़ लखपति दीदियों के साथ तीन करोड़ का सपना साकार होने वाला है।
विपक्ष का यह रुख सत्रभर बहस का आधार बनेगा, जो विकास योजनाओं पर वैचारिक भिन्नता को उजागर करता है।