त्रिपुरा में भाषाई विवाद गहराया है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सहयोगी टीएमपी की कोकबोरोक भाषा को रोमन लिपि में लाने की मांग को पूरी तरह नकार दिया। नौ आदिवासी समुदायों की यह भाषा राज्य की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है।
जोलाईबाड़ी की सभा में साहा ने स्पष्ट किया कि भाजपा किसी विदेशी लिपि का समर्थन नहीं करेगी। विशेषज्ञों से उपयुक्त स्वदेशी लिपि चुनने को कहा गया।
रोमन अपनाने से युवाओं का परंपरागत ज्ञान, रीति-रिवाज भूलने का खतरा बताया। चकमा लिपि का जिक्र कर कोकबोरोक के लिए स्वावलंबन की अपील की।
टीटीएएडीसी चुनाव नजदीक हैं, ऐसे में यह बयान गठबंधन में तनाव पैदा कर सकता है। साहा ने रोमन मांग को युवा भ्रम का हथियार बताया।
सरकार के प्रयासों में आदिवासी कल्याण, सांस्कृतिक प्रोत्साहन और राजवंश सम्मान शामिल हैं। भाजपा आदिवासी इलाकों में मजबूती से आगे बढ़ रही है। टीएमपी का आंदोलन जारी है, जो बोडो, गारो जैसी भाषाओं से मिलती-जुलती कोकबोरोक को आधुनिक बनाने पर जोर देता है।