1948 का वो पल जब जनरल करियप्पा ने इतिहास रच दिया। कूर्ग के वीर 1899 में पैदा हुए, ब्रिटिश सेना में प्रथम भारतीय अधिकारी बने और 1949 में आर्मी चीफ। जम्मू-कश्मीर अभियान में उन्होंने जोजिला को आजाद कराया।
पाकिस्तानी कबायलियों ने दर्रा हथिया लिया था। लेह कटने को था। ऊंचाई पर टैंक असंभव माने जाते थे। करियप्पा ने दिल्ली के हुक्म ठुकराए। ब्रिगेडियर अटल की 77वीं पैरा ने टैंक घसीटे, ऑपरेशन बाइसन शुरू।
दुश्मन स्तब्ध। नौशेरा से द्रास तक साफ। लेह जिला 24 नवंबर को। यह पहला मौका था जब इतनी ऊंचाई पर बख्तरबंद युद्ध हुआ।
करियप्पा ने इंटेलिजेंस को हथियार बनाया। उनकी विरासत आज सियाचिन, गलवान में दिखती है। बिना उनके साहस के लद्दाख अलग हो सकता था। राष्ट्रप्रेम का ये उदाहरण अमर।