कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र की आर्थिक रणनीतियों पर तीखा हमला बोला। नई रिपोर्ट ‘रियल स्टेट ऑफ द इकोनॉमी 2026’ में आरोप लगाया गया कि सरकारी नीतियां बेरोजगारी युक्त विकास को जन्म दे रही हैं। आर्थिक आंकड़ों और जमीनी हकीकत में बड़ा फासला है।
2017-18 से 2023-24 तक के आंकड़ों से साफ है कि मैन्युफैक्चरिंग रोजगार 12.1% से घटकर 11.4% रह गया। सर्विस सेक्टर 31.1% से 29.7% पर सिमट गया। कृषि में हिस्सा 44.1 से 46.1% बढ़ा, जो उद्योगों की नाकामी से ग्रामीणों का लौटना दिखाता है।
रोजगार वृद्धि असंगठित क्षेत्रों तक सीमित है। 40% सैलरीड वर्कर्स बिना कॉन्ट्रैक्ट, लीव या सिक्योरिटी के काम कर रहे हैं। यह श्रम बाजार की कमजोरी को रेखांकित करता है।
रिपोर्ट आधिकारिक डेटा पर भरोसा न करने को कहती है, आईएमएफ के ‘सी’ ग्रेड का जिक्र कर। कम मुद्रास्फीति के दावे के बावजूद खर्च क्यों बढ़े? बचत क्यों गायब, कर्ज क्यों दोगुना? रुपया 2025 का सबसे खराब, एफडीआई कई महीनों में माइनस।
रिलीज पर राजीव गौड़ा ने कहा, रिपोर्ट सरकार के फोकस को उजागर करती है। अमीर-गरीब की खाई चौड़ी, कॉर्पोरेट मुनाफा रिकॉर्ड, नौकरियां गायब। 2026 में सुधार जरूरी, ताकि विकास सबका हो।