असम में राजनीतिक बवाल मचा हुआ है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई ने गणतंत्र दिवस समारोह में विपक्ष नेताओं के साथ प्रोटोकॉल भेदभाव का आरोप लगाया। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को परेड में तीसरी लाइन में स्थान दिया जाना गोगोई को नागवार गुजरा।
मंगलवार को गुवाहाटी में मीडिया से बातचीत में गोगोई ने कहा कि यह संवैधानिक पदों का अपमान है। पीएम संसद को लोकतंत्र मंदिर कहते हैं, लेकिन व्यवहार उल्टा है। उन्होंने ऐसी घटनाओं के दोहराव पर पीएम से स्पष्टीकरण की मांग की।
भाजपा ने पलटवार किया। राहुल पर ‘एट होम’ में पटका न ओढ़ने का इल्जाम लगाया गया। डिगबोई में सीएम सरमा ने इसे पूर्वोत्तर अस्मिता पर चोट बताया। उन्होंने कहा कि राहुल की यह पुरानी कमजोरी है, चर्चा की बर्बादी नहीं करेंगे।
कांग्रेस नेताओं ने आरोपों को सिरे से खारिज किया। गोगोई ने राजनीतिक संयम की सलाह दी और कहा कि सांस्कृतिक मुद्दों को चुनावी हथियार न बनाएं। पूर्वोत्तरवासी कार्यों से नेता तौलते हैं। राहुल ने मुश्किल वक्त में साथ दिया, दूसरी तरफ पीएम गायब रहे।
गणतंत्र दिवस के बाद यह टकराव असम की सियासत को गर्माएगा। प्रोटोकॉल का पालन, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और क्षेत्रीय मुद्दे अब प्रमुखता से उभर रहे हैं। दोनों पक्ष अपनी-अपनी कहानी थोप रहे हैं, जिससे लोकतंत्र की परिपक्वता पर बहस तेज हो गई है।